वर्ष 2026 में आस्था और परंपरा का विशाल संगम मानी जाने वाली श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा (हिमालयीय महाकुंभ) का आयोजन किया जाएगा। यह ऐतिहासिक यात्रा लगभग 280 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करेगी और करीब 20 दिनों तक चलेगी। इस दौरान श्रद्धा का ऐसा सैलाब उमड़ेगा, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रा में सैकड़ों देवी-देवताओं की डोली और छंतोलियां श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी, जो इस आयोजन को और भी दिव्य बना देंगी।श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा का कार्यक्रम बसंत पंचमी के अवसर पर 23 जनवरी को जारी किया जाएगा। इसके लिए नौटी में भव्य महोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं, जहां से इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ घोषित होगा। यह यात्रा हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित होती है और अगस्त-सितंबर माह में संपन्न होती है। लंबे समय से इस यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।यात्रा की व्यापकता और श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए सरकार और आयोजन समिति बीते दो वर्षों से तैयारियों में जुटी हुई है। यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर ढांचागत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। सड़कों के सुधार का कार्य तेज़ी से चल रहा है, जबकि ठहरने, पेयजल, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए विस्तृत इस्टीमेट तैयार कर लिए गए हैं।आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बन सकें। श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी पूरे देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।
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