देहरादून/चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया और वहां मौजूद श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, सुखद और प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने पर विशेष जोर देते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहयोग की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए यात्रा मार्गों पर स्वच्छता और अनुशासन का पालन अत्यंत आवश्यक है।मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर उनका भव्य स्वागत किया और स्थानीय उत्पाद भेंट किए। इस आत्मीय स्वागत से अभिभूत मुख्यमंत्री ने ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराएं राज्य की पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में रह रहे लोगों का योगदान राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक मजबूती में महत्वपूर्ण है।सीएम धामी ने इस अवसर पर वाइब्रेंट विलेज योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और संचार जैसी सुविधाओं के विस्तार से इन क्षेत्रों में न केवल जीवन स्तर बेहतर हो रहा है, बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमांत क्षेत्रों में विकास योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि वहां के लोगों को अधिकतम लाभ मिल सके।
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