देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार पारंपरिक खेती को लाभकारी बनाने के लिए राज्य मिलेट मिशन और श्रीअन्न योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के मोटे अनाज—मडुआ (रागी), झंगोरा (सांवा) और रामदाना (चौलाई) को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप सरकार किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के साथ बीज से लेकर बाजार तक की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर रही है। राज्य के इतिहास में पहली बार मडुआ को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में लाकर सरकारी खरीद की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का निर्धारित और उचित मूल्य मिल रहा है। सहकारी समितियों और जिला स्तरीय क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों से सीधे मडुआ की खरीद की जा रही है। वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। मोटे अनाजों के एकत्रीकरण कार्य में जुटे समूहों को सरकार प्रोत्साहन राशि दे रही है और प्रस्तावित नई मिलेट नीति के तहत इसे दोगुना करने की तैयारी है। इसके साथ ही मडुआ को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और मिड-डे मील योजना में शामिल किए जाने से इसकी मांग और खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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