नई दिल्ली। देश के बड़े हिस्से में आने वाले दिनों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। नागपुर, भोपाल, अमरावती और भुवनेश्वर जैसे शहरों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में भी इस सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई क्षेत्रों में तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते तापमान का सीधा असर मानव शरीर पर पड़ता है। शोधों में पाया गया है कि 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर सांस लेने की गति और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है और ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसे तापमान में रहने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जबकि 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में मस्तिष्क पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।डॉक्टरों के मुताबिक, तेज गर्मी के कारण हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर डायबिटीज और किडनी रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है। हीट एग्जॉशन की स्थिति में अत्यधिक पसीना, कमजोरी, मतली और ऐंठन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि समय रहते उपचार न मिले और यह हीटस्ट्रोक में बदल जाए, तो शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है, जिससे दिमागी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, दौरे पड़ सकते हैं और ऑर्गन फेलियर का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाएं, ताकि हीटवेव के प्रभाव से सुरक्षित रहा जा सके।
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