गन्ना कृषकों को उन्नत खेती और नई प्रजातियों की दी गई जानकारी, गोविंद नगर में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी

काशीपुर। गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर द्वारा गन्ना विकास परिषद काशीपुर परिक्षेत्र के ग्राम गोविंद नगर में एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में गन्ना किसानों को आधुनिक तकनीक आधारित खेती, उन्नत बीज प्रजातियों, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।गोष्ठी को संबोधित करते हुए गन्ना विभाग के प्रचार एवं जनसंपर्क अधिकारी नीलेश कुमार ने किसानों को आगामी गन्ना बुवाई के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती में उचित गहराई और दूरी का विशेष महत्व होता है। किसानों को गहराई में नालियां बनाकर गन्ने की बुवाई करनी चाहिए तथा पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए, जिससे फसल के बेहतर विकास और उत्पादन में वृद्धि हो सके।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गन्ना बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करें तथा केवल प्रमाणित एवं उन्नत गुणवत्ता वाले बीज का ही चयन करें। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान अपनी फसल का नियमित निरीक्षण करें और यदि किसी प्रकार की बीमारी या कीट का प्रकोप दिखाई दे तो उसका फोटो गन्ना शोध केंद्र के वैज्ञानिकों को भेजें, जिससे उन्हें तत्काल तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जा सके।नीलेश कुमार ने कहा कि किसानों को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों के आधार पर गन्ने की खेती करनी चाहिए। उन्होंने भूमि परीक्षण के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि मिट्टी में 16 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। भूमि की जांच कराने से यह पता चल जाता है कि किस पोषक तत्व की कमी है, जिससे आवश्यक पूर्ति कर भूमि की उर्वरता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को उन्नत गन्ना प्रजातियों, फसल में लगने वाले रोगों और कीटों, उनके नियंत्रण के उपायों, वैज्ञानिक खेती की तकनीकों तथा गन्ना विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान करना था।गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत गन्ना प्रजातियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 15023, 13235, 14201 तथा 12226 जैसी उन्नतशील प्रजातियां बेहतर उत्पादन दे रही हैं और किसानों को इनके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।वैज्ञानिकों ने बताया कि गन्ने की लोकप्रिय प्रजाति 0238 वर्तमान में रेड रॉट रोग की चपेट में आ चुकी है। इसलिए किसानों को इस प्रजाति की बुवाई नहीं करने और इसके स्थान पर नई उन्नत एवं रोग प्रतिरोधी प्रजातियों को अपनाने की सलाह दी गई।गोष्ठी में वैज्ञानिकों द्वारा कीट एवं रोग प्रबंधन पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक, गन्ना विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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संपादक : एफ यू खान

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