नैनीताल। शहर के मध्य स्थित 27 एकड़ क्षेत्र में फैला ऐतिहासिक रैमजे (जीबी पंत) अस्पताल वर्षों की उपेक्षा के कारण बदहाली का शिकार हो गया है। अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और कार्यालय बंद पड़े हैं तथा अधिकांश भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। उपचार की सुविधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है।ब्रिटिश काल में वर्ष 1893 में स्थापित यह अस्पताल कभी कुमाऊं मंडल के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल था। यहां दूर-दराज क्षेत्रों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे, लेकिन वर्तमान में अस्पताल में सीमित स्टाफ ही तैनात है। उपलब्ध चिकित्सक भी उच्च शिक्षा के लिए अवकाश पर हैं, जबकि अधिकांश सुविधाएं निष्क्रिय हो चुकी हैं।शुक्रवार को क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति देखकर उन्होंने चिंता व्यक्त की। सांसद को बताया गया कि अस्पताल में नियमित चिकित्सा सेवाएं संचालित नहीं हो रही हैं और भवनों का उपयोग कभी-कभी फिल्म एवं वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किया जाता है।स्थिति का संज्ञान लेते हुए सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से दूरभाष पर वार्ता कर अस्पताल के पुनरुद्धार के लिए समिति गठित करने का अनुरोध किया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अस्पताल के जीर्णोद्धार संबंधी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। सांसद ने कहा कि अस्पताल के विकास और पुनर्संचालन के लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा।अस्पताल परिसर में वर्तमान में हंस फाउंडेशन के सहयोग से डायलिसिस सेवा संचालित की जा रही है, जबकि अन्य अधिकांश चिकित्सा सुविधाएं बंद पड़ी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के सुधार के लिए पूर्व में कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की जाएगी।निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी भी उपस्थित रहे।
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