देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम, दूरस्थ एवं सर्दियों में बर्फ से ढके रहने वाले हिमालयी क्षेत्रों में जनगणना का कार्य इस वर्ष निर्धारित समय से पहले शुरू किया जाएगा। राज्य के चार पर्वतीय जिलों के 131 गांवों और तीन प्रमुख हिमालयी नगरों में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक जनगणना अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान लगभग 52 हजार लोगों की जनसंख्या का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाएगा। जनगणना निदेशालय ने इस विशेष अभियान की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जबकि प्रदेशभर में जनगणना के दूसरे चरण की प्रक्रिया 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वगणना (Self Enumeration) के माध्यम से पूरी कराई जाएगी। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मैदानी और अन्य क्षेत्रों में भी जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।उत्तराखंड उन चार हिमालयी राज्यों में शामिल है, जहां अत्यधिक ऊंचाई वाले और सर्दियों में लंबे समय तक बर्फ से ढके रहने वाले क्षेत्रों में जनगणना का कार्य मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पहले कराया जाता है। अन्य राज्यों में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान भारी हिमपात और संपर्क मार्ग बंद होने के कारण जनगणना कराना कठिन हो जाता है, इसलिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा विशेष व्यवस्था के तहत पहले चरण में इन इलाकों को शामिल किया गया है। जनगणना की औपचारिक शुरुआत भी इन्हीं हिमालयी क्षेत्रों से की जाएगी।विशेष अभियान के तहत चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों के चिन्हित 131 गांवों के साथ-साथ केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री नगर क्षेत्रों में भी जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनगणना कर्मी निर्धारित अवधि के दौरान प्रत्येक घर तक पहुंचकर परिवारों और निवासियों का विवरण एकत्र करेंगे। इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक संशोधन चरण (रिविजनल राउंड) संचालित किया जाएगा, जिसमें यदि किसी व्यक्ति या परिवार का विवरण छूट गया हो या उसमें कोई त्रुटि हो तो उसका सुधार किया जाएगा। इन हिमालयी क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। जनगणना निदेशालय का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों में भी सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध जनगणना सुनिश्चित करना है, ताकि प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सके।
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