देहरादून। उत्तराखंड खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए राजस्व वृद्धि, बकाया वसूली तथा अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। खनन निदेशालय, देहरादून में निदेशक राजपाल लेघा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिला खान अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग का ₹1500 करोड़ राजस्व प्राप्ति लक्ष्य निर्धारित किया गया। निदेशक ने सभी जिला खान अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति के साथ विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।बैठक में प्रदेशभर में अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। निदेशक राजपाल लेघा ने अधिकारियों से कहा कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमित अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वालों के प्रति किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके साथ ही ई-चेक गेट प्रणाली के माध्यम से जारी ई-चालानों की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। समीक्षा बैठक में पिछले कई वर्षों से लंबित अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए लगभग ₹250 करोड़ की बकाया धनराशि की वसूली के लिए संबंधित प्रकरणों में रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करने के निर्देश दिए गए। निदेशक ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल राजस्व लक्ष्य हासिल करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना भी है। उन्होंने सभी जिला खान अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय कार्यों में तेजी लाते हुए राजस्व वसूली, लंबित मामलों के निस्तारण तथा अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाए, जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
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