उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बदलेगा नियमों का ढांचा, नई आपूर्ति संहिता में स्मार्ट मीटर, बिजली चोरी और सोसाइटी कनेक्शन पर होंगे स्पष्ट प्रावधान

देहरादून। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों, विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था और कनेक्शन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट एवं व्यवस्थित बनाने के लिए विद्युत नियामक आयोग नई आपूर्ति संहिता में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल करने जा रहा है। प्रस्तावित नई संहिता में स्मार्ट मीटर से संबंधित नियमों, बिजली चोरी की पहचान, चेक मीटर की व्यवस्था और आवासीय सोसाइटी में अलग-अलग विद्युत कनेक्शन लेने जैसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनियों के बीच आने वाली विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट नियम उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में वर्ष 2020 में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने आपूर्ति संहिता लागू की थी, जिसके अंतर्गत नए बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया, निर्धारित समय-सीमा और उससे संबंधित शुल्क तय किए गए थे। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने, मीटर लगाने, मीटर की जांच, बिजली बिल तैयार करने और मीटर रीडिंग से जुड़े प्रावधान भी निर्धारित किए गए थे। बिजली चोरी की पहचान, स्वीकृत विद्युत भार में वृद्धि या कमी, कनेक्शन काटने और दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर भी दिशा-निर्देश बनाए गए थे। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण और उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच से संबंधित व्यवस्थाओं को भी संहिता में शामिल किया गया था। अब लगभग छह वर्ष के अंतराल में विद्युत क्षेत्र में आए बदलावों और सामने आई नई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संहिता को अद्यतन किया जा रहा है। विद्युत नियामक आयोग के सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी के अनुसार, नई आपूर्ति संहिता में पिछले वर्षों के दौरान सामने आए बदलावों और विभिन्न विषयों से संबंधित नए प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है। नई व्यवस्था में स्मार्ट मीटर से जुड़े उपभोक्ताओं के अधिकारों और बिजली चोरी की पहचान से संबंधित नियमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली चोरी का पता लगाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट मानक निर्धारित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत यह तय करने का प्रयास होगा कि स्मार्ट मीटर से प्राप्त आंकड़ों और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर बिजली चोरी से जुड़े मामलों की पहचान किस प्रकार की जाएगी। साथ ही, चेक मीटर लगाने अथवा अन्य उपयुक्त तकनीकी उपायों के माध्यम से विवादों की जांच और समाधान करने से संबंधित प्रावधान भी नई संहिता का हिस्सा बन सकते हैं। इससे बिजली चोरी के मामलों में तकनीकी आधार पर जांच करने और संबंधित मानकों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। स्मार्ट मीटर का इस्तेमाल बढ़ने के साथ बिजली की खपत का आकलन करने और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी के तरीकों में भी बदलाव आया है। ऐसे में उपभोक्ताओं और विद्युत वितरण कंपनियों के बीच मीटर की रीडिंग, खपत अथवा बिजली चोरी से संबंधित किसी विवाद की स्थिति में स्पष्ट नियम होना महत्वपूर्ण है। नई संहिता में इन पहलुओं को शामिल करने का उद्देश्य तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप नियमों को अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि जांच और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के आधार पर संचालित की जा सके। इसके अलावा, आवासीय सोसाइटी में अलग-अलग बिजली कनेक्शन लेने की व्यवस्था भी नई आपूर्ति संहिता का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। वर्तमान व्यवस्था में कई आवासीय सोसाइटियों को बल्क सप्लाई के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जाती है, जिसके तहत पूरी सोसाइटी के लिए सामूहिक रूप से बिजली ली जाती है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग निवासियों को स्वतंत्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने को लेकर व्यावहारिक सवाल सामने आते रहे हैं। पिछले दिनों विद्युत नियामक आयोग ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि यदि किसी आवासीय सोसाइटी के 50 प्रतिशत निवासी पृथक बिजली कनेक्शन लेने के लिए सहमत होते हैं, तो वे अलग कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, यदि निर्धारित संख्या में निवासी सहमत नहीं होते हैं, तो सोसाइटी में बल्क सप्लाई के माध्यम से बिजली लेने की मौजूदा व्यवस्था जारी रहती है। अब आयोग इस व्यवस्था को नई आपूर्ति संहिता में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि आवासीय सोसाइटियों में बिजली कनेक्शन से संबंधित नियम अधिक स्पष्ट हो सकें। इस प्रावधान से सोसाइटी के निवासियों को अलग कनेक्शन लेने के विकल्प और सामूहिक आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित शर्तों को समझने में आसानी हो सकती है। इसके साथ ही, सोसाइटी प्रबंधन, निवासियों और विद्युत वितरण कंपनी के बीच कनेक्शन संबंधी विवादों के समाधान में भी स्पष्ट नियम उपयोगी साबित हो सकते हैं। नई संहिता में उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान, मीटर संबंधी प्रक्रियाओं, विद्युत भार में बदलाव और कनेक्शन काटने या जोड़ने जैसे पुराने प्रावधानों को भी बदलती जरूरतों के अनुरूप शामिल किया जाएगा। वर्ष 2020 में लागू संहिता ने बिजली कनेक्शन और आपूर्ति से जुड़े विभिन्न पहलुओं के लिए नियम निर्धारित किए थे, लेकिन बीते छह वर्षों में स्मार्ट मीटर जैसी तकनीकों के विस्तार और आवासीय सोसाइटियों से जुड़े मुद्दों के कारण नए प्रावधानों की आवश्यकता सामने आई है। आयोग की ओर से इन विषयों को नई संहिता में शामिल करने का प्रयास इसी दिशा में किया जा रहा है। नई आपूर्ति संहिता लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं, आवासीय सोसाइटियों और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए संबंधित नियमों को समझना और उनका पालन करना अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। खास तौर पर स्मार्ट मीटर से जुड़े मामलों, बिजली चोरी की पहचान और पृथक विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था पर स्पष्ट प्रावधान होने से उपभोक्ताओं के अधिकारों तथा बिजली आपूर्ति संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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