प्रदेश की अदालतों में बदलेगा कामकाज का तरीका, अब फाइलों की जगह डिजिटल रिकॉर्ड देख सकेंगे वादी-अधिवक्ता

प्रदेश के न्यायालयों में जल्द ही केस की मोटी-मोटी फाइलें अतीत की बात हो जाएंगी। आने वाले समय में न्यायालयों में कागजी फाइलों की जगह डिजिटल फाइलें देखने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए शासन की ओर से बजट जारी कर दिया गया है और प्रदेशभर के न्यायालय परिसरों में कुल 22 कियोस्क मशीनें स्थापित की जाएंगी, जिनके माध्यम से न्यायिक अभिलेखों का ई-निरीक्षण किया जा सकेगा।वर्तमान व्यवस्था में न्यायालयों में केस से जुड़ी फाइलों को देखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हर तारीख पर रिकॉर्ड रूम से फाइलें निकाली जाती हैं, जिन्हें न्यायालय में पेश किया जाता है। संबंधित वकील, वादी और प्रतिवादी भी कई बार इन फाइलों का अवलोकन करते हैं। जैसे-जैसे मुकदमा आगे बढ़ता है, फाइलें और अधिक मोटी व जटिल होती जाती हैं, जिससे न केवल उन्हें संभालना मुश्किल होता है बल्कि आवश्यक दस्तावेज ढूंढना भी समयसाध्य प्रक्रिया बन जाती है। इसी समस्या के समाधान के लिए अब न्यायिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।शासन स्तर पर इस दिशा में अहम कदम उठाते हुए सभी जिला न्यायालयों में न्यायिक अभिलेखों के ई-निरीक्षण की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी की ओर से उच्च न्यायालय नैनीताल के महानिबंधक को 38 लाख 50 हजार रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस बजट से कियोस्क मशीनों की स्थापना और डिजिटल निरीक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि प्रदेश के जिला न्यायालयों में न्यायिक रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। अब कियोस्क मशीनों के माध्यम से यह प्रक्रिया और प्रभावी हो जाएगी। इससे न केवल न्यायालयों में कामकाज की गति तेज होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और वादी-अधिवक्ताओं को रिकॉर्ड देखने में आसानी होगी। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से न्यायिक प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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संपादक : एफ यू खान

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