काशीपुर।शहर के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में गिना जाने वाला महाराणा प्रताप चौक स्थित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अब खुद सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बनकर खड़ा है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया यह पुल, जो ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था, उद्घाटन के कुछ ही समय बाद अपनी खराब गुणवत्ता और कमजोर निर्माण के कारण चर्चा में आ गया है। आज स्थिति यह है कि यह पुल सुविधा कम और खतरा ज्यादा नजर आ रहा है।साल 2017 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य लंबे इंतजार के बाद 2024 में पूरा हुआ, लेकिन शुरुआत से ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे। मार्च में पुल पर दरारें आने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगानी पड़ी थी। बाद में जल्दबाजी में मरम्मत कर पुल को फिर खोल दिया गया, लेकिन यह कदम स्थायी समाधान साबित नहीं हुआ। कुछ ही समय में एक्सपेंशन ज्वाइंट फिर से क्षतिग्रस्त हो गए और डामर उखड़ने लगा, जिससे निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने आ गई।मौजूदा हालात यह हैं कि पुल के कई हिस्सों में ज्वाइंट टूट चुके हैं और सड़क की परतें जगह-जगह से उखड़ रही हैं। हर बार मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की खामियां भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं, खासकर जब भारी वाहन लगातार इस पर गुजर रहे हों।सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब पुल की क्षमता संदिग्ध है, तो ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय नियमों की अनदेखी कर भारी वाहन बेधड़क पुल से गुजरते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।इसके अलावा, पहले हुई क्षति के बाद जांच के आदेश तो दिए गए थे, लेकिन अब तक न तो कोई रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या एजेंसी पर कार्रवाई की गई। यह स्थिति न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर भी असर डालती है।अब जरूरत केवल मरम्मत करने की नहीं, बल्कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, जिम्मेदारी तय करने और स्थायी समाधान लागू करने की है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे प्रोजेक्ट्स में लापरवाही दोहराई जाती रहेगी।शहर के लोग अब यह जानना चाहते हैं कि यह पुल आखिर सुरक्षित है या नहीं—और अगर नहीं, तो जिम्मेदार कौन है?
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