जागृति पब्लिक स्कूल में एकलव्य फाउंडेशन की कार्यशाला, बच्चों की स्किल डेवलपमेंट पर दिया जोर

काशीपुर। जागृति पब्लिक स्कूल में एकलव्य फाउंडेशन की ओर से दो घंटे की विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को पढ़ाने के आधुनिक और प्रभावी तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों की केवल सिलेबस आधारित पढ़ाई के बजाय उनकी स्किल डेवलपमेंट, क्रिएटिविटी और इमेजिनेशन पावर को विकसित करना रहा।कार्यशाला में एकलव्य फाउंडेशन से आए श्री ऋषभ भटनागर एवं उनके पिता श्री राकेश भटनागर ने शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बदलते समय के साथ शिक्षण के तरीकों में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है। बच्चों को केवल किताबें याद कराने के बजाय उनकी रीडिंग, राइटिंग, ट्रांसलेशन, हैंडराइटिंग, एक्सप्लेनेशन, क्वेश्चन मेकिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स को विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है।उन्होंने बताया कि बच्चों को अध्याय पढ़ाने के दौरान उनकी सोच और कल्पनाशक्ति को बढ़ाने के लिए उन्हें अपने विचारों को ड्रॉइंग के माध्यम से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाता है। बच्चे जब किसी चैप्टर को अपने इमेजिनेशन के आधार पर चित्र बनाकर समझते हैं, तो उनकी सीखने की क्षमता बढ़ती है और वे विषय को लंबे समय तक याद रख पाते हैं। इस तरीके से बच्चों में क्रिएटिव थिंकिंग और कॉन्सेप्ट बेस्ड लर्निंग विकसित होती है।उन्होंने कहा कि एक्टिविटी बेस्ड और प्रैक्टिकल शिक्षण पद्धति अपनाने से बच्चे कम समय में अधिक चीजें आसानी से सीख सकते हैं।

बच्चों को बिल्कुल शुरुआती स्तर यानी जीरो लेवल से तैयार किया जाता है, जिससे हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके।कार्यशाला में शिक्षकों को यह भी बताया गया कि बच्चों को विषय समझाने, स्वयं प्रश्न बनाने, चित्रों के माध्यम से सीखने और वीडियो आधारित गतिविधियों के जरिए पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही प्रतियोगिता के साथ सहयोगात्मक शिक्षा पर भी जोर देने की बात कही गई।इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक कौशल किशोर पंत, प्रधानाचार्या बबीता पंत सहित समस्त विद्यालय स्टाफ मौजूद रहा। कार्यशाला के समापन पर एमडी सर एवं विद्यालय प्रबंधन की ओर से श्री ऋषभ भटनागर और श्री राकेश भटनागर को स्मृति चिन्ह एवं शील्ड देकर सम्मानित किया गया। सभी शिक्षकों ने कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करते हुए नई शिक्षण तकनीकों को उपयोगी बताया। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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संपादक : एफ यू खान

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