ऊधम सिंह नगर में जल संरक्षण पर मंथन, काशीपुर-जसपुर के अर्द्ध-क्रिटिकल भू-जल क्षेत्रों के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना

रुद्रपुर। स्प्रिंग एंड रिवर रिजूविनेशन अथॉरिटी (SARRA) के तत्वावधान में गुरुवार को लघु सिंचाई विभाग द्वारा विकास भवन सभागार में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ लघु सिंचाई विभाग परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम के साथ हुआ, जहां पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया गया।कार्यशाला में सदस्य सचिव, सारा एवं अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई सुशील कुमार ने सभी अतिथियों और विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए उन्हें पौधे भेंट किए। इसके बाद विक्रांत सिंह भंडारी ने फीका नदी में प्रस्तावित चयनित कार्यों को लेकर पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण (PPT) के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी और जल संरक्षण की योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि जनपद के काशीपुर और जसपुर विकासखंड अर्द्ध-क्रिटिकल (Semi-Critical) भू-जल क्षेत्र की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर को सुरक्षित रखने के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सारा के अंतर्गत प्रस्तावित भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं को लेकर विशेषज्ञों से सुझाव भी आमंत्रित किए।कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर ए.एस. मौर्य ने जनपद की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं की उपयोगिता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के वैज्ञानिक मो. अरशद ने भू-जल पुनर्भरण परियोजनाओं की व्यवहारिकता (Feasibility) पर प्रकाश डालते हुए काशीपुर और जसपुर में प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।इसके अलावा जलागम प्रबंधन निदेशालय के जियोहाइड्रोलॉजिस्ट शिवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रस्तावित कार्ययोजनाओं के बेसलाइन प्रारूप से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। वहीं सामाजिक विशेषज्ञ गीता रावत ने जल मित्र, जल सखी और नौला समितियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल संरक्षण अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण आधार है।कार्यशाला के समापन पर मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विशेषज्ञों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों एवं सारा टीम को निर्देश दिए कि जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन से जुड़े सभी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और भविष्य की जल सुरक्षा के लिए अभी से ठोस प्रयास आवश्यक हैं।कार्यशाला में आईआईटी रुड़की, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, जलागम प्रबंधन निदेशालय के विशेषज्ञों के साथ जनपद के विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता तथा अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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