काशीपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) काशीपुर शाखा ने फिल्म ‘सूर्या-अंत से आरंभ तक’ की प्रचार सामग्री में चिकित्सा पेशेवरों को कथित तौर पर खलनायक के रूप में प्रस्तुत किए जाने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। प्रेस वार्ता के दौरान आईएमए ने फिल्म को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मामले में हस्तक्षेप करने और चिकित्सा पेशेवरों व मरीजों के हित में फिल्म पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।आईएमए काशीपुर शाखा के अध्यक्ष डा- पीके दीक्षित ने कहा कि चिकित्सा पेशे से जुड़े किसी व्यक्ति की गलती या अनैतिक कार्य को पूरे चिकित्सा समुदाय से जोड़कर देखना उचित नहीं है। चिकित्सक, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसी स्वतंत्रता का इस्तेमाल किसी पूरे पेशे को बदनाम करने या स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हिंसा को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए। डा दीक्षित ने कहा कि किसी भी शिकायत या असंतोष को स्वास्थ्य की देखभाल करने वालों के विरुद्ध हिंसा का औचित्य नहीं बनाया जा सकता। समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक रास्ते मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार अथवा अनैतिक कार्य सामने आने पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही होनी चाहिए, लेकिन कुछ लोगों के कृत्यों के कारण पूरे चिकित्सा पेशे को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है। आईएमए ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता के लिए मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास बेहद जरूरी है। फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया गया कि संवेदनशील विषयों पर कहानियां प्रस्तुत करते समय जिम्मेदारी का भी ध्यान रखा जाए, ताकि जनता का स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास मजबूत हो और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा प्रभावित न हो। इस दौरान आईएमए की काशीपुर शाखा अध्यक्ष डॉ- पीके दीक्षित, सचिव डॉ- तरुण सोलंकी, डॉ- अरविंद शर्मा, डॉ- यशपाल रावत, डॉ- सतांशु माथुर, डॉ- पारूल सिंघल, डॉ- केके अग्रवाल, डॉ- पुनीत बंसल, डॉ- मनोज कुशवाहा, डॉ- राहुल सिंघल आदि मौजूद रहे।
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