देहरादून/चमोली। उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की प्रबल संभावना जताई गई है, जबकि मैदानी और अधिकांश अन्य जिलों में मौसम फिलहाल शुष्क रहने का अनुमान है। रविवार को मौसम में बदलाव के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक होकर 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से तीन डिग्री अधिक 12.8 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लगभग इसी प्रकार का मौसम दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 24 फरवरी को भी प्रदेश में मौसम का रुख लगभग ऐसा ही बना रह सकता है, जबकि 25 से 28 फरवरी तक अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।वहीं चमोली जनपद में रविवार को मौसम ने अचानक करवट बदल दी। ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश के कारण ठंडक बढ़ गई और लोगों को सर्द मौसम का सामना करना पड़ा। गोपेश्वर नगर क्षेत्र में कुछ समय के लिए बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित रहा। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, काली माटी, नंदा घुंघटी समेत नीती और माणा घाटियों में बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि ज्योतिर्मठ, पोखरी, पीपलकोटी, नंदानगर और नंदप्रयाग क्षेत्रों में बारिश हुई। मौसम खराब होने के चलते लोग घरों में ही दुबके रहे और बाजारों में भी चहल-पहल कम देखने को मिली।इसी बीच आंधी-तूफान का असर यातायात पर भी पड़ा। रविवार शाम करीब चार बजे बिरही के पास बदरीनाथ हाईवे पर तेज आंधी के कारण चीड़ के दो पेड़ टूटकर सड़क पर गिर गए, जिससे करीब एक घंटे तक वाहनों की आवाजाही बाधित रही। उस समय निजमुला घाटी से लौट रहे बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला भी जाम में फंस गए। बाद में विधायक और अन्य यात्रियों ने मिलकर पेड़ों के अवशेष हटाए, जिसके बाद हाईवे पर यातायात सुचारु हो सका। गनीमत रही कि पेड़ गिरने के समय वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। वहीं बिरही-निजमुला मोटर मार्ग पर भी कई स्थानों पर आंधी के कारण चीड़ की टहनियां सड़क पर आ गिरीं, जिन्हें स्थानीय लोगों ने हटाकर मार्ग को चालू किया।मौसम विभाग ने आगे के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार जताए हैं। विशेषज्ञों ने पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि मौसम में अचानक बदलाव से ऊंचाई वाले इलाकों में फिसलन और ठंड बढ़ सकती है।
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