उत्तराखंड में पूरी हुई जंगली हाथियों की गणना, कालसी के जंगलों में पहली बार दर्ज हुई मौजूदगी

रामनगर। उत्तराखंड में जंगली हाथियों की गणना का महत्वपूर्ण अभियान शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस बार की गणना में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनमें देहरादून जिले के कालसी वन क्षेत्र में पहली बार हाथियों की मौजूदगी दर्ज होना विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्र अब तक हाथियों की नियमित गतिविधियों वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं था, ऐसे में यहां हाथियों का पाया जाना वन्यजीवों के बदलते मूवमेंट और आवासीय विस्तार का संकेत माना जा रहा है।राज्यभर में वन विभाग की विभिन्न टीमों ने निर्धारित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण कर हाथियों की गणना का कार्य पूरा किया। इस दौरान हाथियों की संख्या, उनके झुंडों की गतिविधियों तथा आवासीय क्षेत्रों का भी आंकलन किया गया।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कई वन रेंजों में अभी तक हाथियों का प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न देना उनकी जल स्रोतों की ओर बढ़ी गतिविधियों के कारण माना जा रहा है। विशेष रूप से तराई केंद्रीय वन प्रभाग की रुद्रपुर, पीपलपड़ाव और बरहैनी रेंज के साथ-साथ हरिद्वार वन प्रभाग की खानपुर एवं हरिद्वार रेंज में हाथियों की मौजूदगी अपेक्षा के अनुरूप दर्ज नहीं हो सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों की ओर हाथियों के झुंडों के जाने के कारण उनकी सामान्य गतिविधियों में बदलाव देखा गया है।वन विभाग का कहना है कि गणना के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, जिसके बाद राज्य में हाथियों की वास्तविक संख्या और उनके मूवमेंट पैटर्न को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कालसी क्षेत्र में हाथियों की पहली बार दर्ज हुई मौजूदगी भविष्य में संरक्षण रणनीतियों और वन्यजीव प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। राज्य में हाथियों की बढ़ती गतिविधियां वन विभाग के लिए जहां संरक्षण की चुनौती हैं, वहीं यह प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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संपादक : एफ यू खान

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