देहरादून। धामी सरकार ने प्रदेश में नए श्रम कानूनों के तहत श्रमिकों के हित में कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को लागू करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली-2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत कंपनियों द्वारा कर्मचारियों से ओवरटाइम कराने पर उन्हें दोगुनी मजदूरी देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव को रोकने के लिए समान कार्य करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान वेतन देने की व्यवस्था की गई है। नई नियमावली के अनुसार सभी कंपनियों के लिए कर्मचारियों को हर महीने की सात तारीख तक वेतन का भुगतान करना अनिवार्य होगा। कर्मचारियों का वेतन डिजिटल माध्यम से देने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिससे भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी और वेतन से संबंधित शिकायतों को कम करने में मदद मिलेगी।नई श्रम नियमावली में कंपनी और कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों के समाधान के लिए भी कानूनी व्यवस्था की गई है। ऐसे मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए एक कमेटी के माध्यम से समाधान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि कर्मचारियों को वेतन संबंधी मामलों में लंबे समय तक परेशानी न उठानी पड़े। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी किसी कर्मचारी को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं कर सकेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों के अनुरूप वेतन और सुविधाएं उपलब्ध कराना, भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना तथा कार्यस्थल पर भेदभाव को रोकना है। सरकार के अनुसार उत्तराखंड पहले से ही श्रमिकों को बेहतर मजदूरी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है और नई श्रम नियमावली के माध्यम से श्रमिकों के वेतन और अधिकारों को और अधिक सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है।
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