नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय प्रणाली से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में, विशेषकर किसानों के लिए, एक निर्णायक कदम है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार, अनुचित साधनों पर रोक लगाने और युवाओं के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में व्यापक कदम उठा रही है। उन्होंने हाल ही में 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम के नेतृत्व में सफल अंतरिक्ष रॉकेट लॉन्च का उल्लेख करते हुए इसे युवाओं की क्षमता और ऊर्जा का उदाहरण बताया। स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को भी मंजूरी दी है, जिनमें 13 मरणोपरांत पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों में 9 कीर्ति चक्र, जिनमें 7 मरणोपरांत हैं, 1 शौर्य चक्र के लिए ‘बार’, 19 शौर्य चक्र, जिनमें 1 मरणोपरांत है, 5 सेना मेडल (वीरता) के लिए ‘बार’, 36 सेना मेडल (वीरता), जिनमें 5 मरणोपरांत हैं, 3 नौसेना मेडल (वीरता) और 5 वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं। राष्ट्रपति के संबोधन में राष्ट्र निर्माण, न्याय तक समान पहुंच, युवाओं की क्षमता, परीक्षा व्यवस्था में सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा और वीर जवानों के योगदान सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।
संपादक : एफ यू खान
संपर्क: +91 9837215263
