त्योहारों को लेकर कुम्हारों के घरों में चाक ने पकड़ी रफ्तार

काशीपुर। त्योहारों को लेकर कुम्हारों के घरों में चाक की रफ्रतार तेज हो गई है। पारंपरिक तरीके से मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कुम्हारों को उम्मीद है कि इस बार त्योहार पर अच्छी बिक्री होगी, जिससे उनके कारोबार को गति मिलेगी और परिवारों की आमदनी बढ़ेगी।मिट्टी के दीये भारतीय परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। दिवाली पर घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीये जलाने की परंपरा आज भी कायम है। हालांकि, महंगाई और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने कुम्हारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मिट्टी जुटाने से लेकर उसे तैयार करने, दीये बनाने और पकाने तक में काफी मेहनत और ऽर्च होता है। ऐसे में कुम्हारों को उम्मीद है कि लोग पारंपरिक मिट्टðी के दीयों को प्राथमिकता देंगे, जिससे उनके पुश्तैनी कारोबार को सहारा मिल सकेगा।

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संपादक : एफ यू खान

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