नैनीताल। नैनीताल स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में वन्य जीव संरक्षण को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। चिड़ियाघर में संरक्षित वन्य जीवों की पहली बार जीन सैंपलिंग की जाएगी, जिसके तहत उनका डीएनए प्रोफाइल तैयार कर आनुवांशिक डाटा सुरक्षित रखा जाएगा।जू प्रबंधन का मानना है कि यह पहल वन्य जीवों में इनब्रीडिंग की रोकथाम और प्रजातियों के बेहतर संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगी। पहले चरण में दार्जिलिंग से नैनीताल लाए गए रेड पांडा की जीन सैंपलिंग की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में चिड़ियाघर में मौजूद अन्य वन्य जीवों और पक्षियों के भी डीएनए सैंपल लिए जाएंगे।जानकारी के अनुसार जीन सैंपलिंग और आनुवांशिक डाटा तैयार करने के लिए जू प्रबंधन ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) से पत्राचार किया है। वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए प्रत्येक जीव का आनुवांशिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य में प्रजातियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों में मदद मिलेगी।गौरतलब है कि नैनीताल स्थित यह उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान वन्य जीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी विशेष पहचान रखता है। वर्तमान में यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लाए गए 29 प्रजातियों के 200 से अधिक जीव और पक्षी संरक्षित किए गए हैं। पर्यटकों के बीच रेड पांडा, हिमालयी भालू, तेंदुआ और विभिन्न दुर्लभ पक्षी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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