डिजिटल भूमि बंदोबस्ती की दिशा में बड़ा कदम, पांच गांवों में शुरू हुआ आधुनिक सर्वे कार्य

देहरादून। उत्तराखंड में भूमि अभिलेखों को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के पांच गांवों में डिजिटल बंदोबस्ती कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना के तहत भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर भविष्य में राज्य के अन्य गांवों में भी बंदोबस्ती की प्रक्रिया लागू की जाएगी।राज्य में साठ के दशक के बाद व्यापक भूमि बंदोबस्ती का कार्य नहीं हो पाया था। लंबे समय से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब राजस्व विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पौड़ी जिले के थली और निसनी, टिहरी जिले के पनसूतर और मुखमल तथा हरिद्वार जिले के हंसावाला गांव का चयन कर कार्य शुरू किया है।इस परियोजना के अंतर्गत ड्रोन सर्वेक्षण, भू-सत्यापन, भूमि अभिलेखों का मिलान तथा संबंधित पक्षों की सुनवाई जैसी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही हैं। पांचों गांवों में ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। हंसावाला गांव में भू-सत्यापन का कार्य भी पूर्ण हो गया है, जबकि पौड़ी के दोनों गांवों में लगभग 95 प्रतिशत सत्यापन कार्य संपन्न हो चुका है। टिहरी के चयनित गांवों में यह प्रक्रिया जारी है।राजस्व विभाग के अनुसार वर्तमान में भूमि संबंधी अधिकांश रिकॉर्ड और नक्शे मैनुअल स्वरूप में उपलब्ध हैं। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद भूमि संबंधी जानकारी अधिक सटीक, पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध हो सकेगी, जिससे आम नागरिकों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।इसके साथ ही अल्मोड़ा, किच्छा, भगवानपुर और नरेंद्र नगर क्षेत्रों में भी डिजिटल भूमि रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य चल रहा है। विभाग को आगामी महीने तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।राजस्व परिषद की सचिव रंजना राजगुरु ने कहा कि पांच गांवों में चल रहे इस पायलट प्रोजेक्ट से प्राप्त अनुभवों के आधार पर भविष्य में राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी डिजिटल बंदोबस्ती का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल भूमि अभिलेख व्यवस्था लागू होने से राजस्व प्रशासन अधिक प्रभावी बनेगा और भूमि संबंधी विवादों के समाधान में भी मदद मिलेगी।

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संपादक : एफ यू खान

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