देहरादून। हरिद्वार बाईपास (फेज-2) परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रही एलाइनमेंट तय करने की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने प्रस्तावित एलाइनमेंट को अंतिम स्वीकृति के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेज दिया है। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।प्रस्तावित परियोजना के तहत चंडीदेवी मंदिर बैरियर से नेपाली फार्म तक नया बाईपास विकसित किया जाएगा। इस बाईपास का अधिकांश हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरेगा, जो वन्यजीवों और जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यही कारण रहा कि इस परियोजना के लिए उपयुक्त एलाइनमेंट तय करने में करीब एक वर्ष तक व्यापक मंथन और तकनीकी अध्ययन किया गया।जानकारी के अनुसार, एनएचएआई ने ऐसा मार्ग चुनने का प्रयास किया है जिससे वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। इसके लिए कई संभावित एलाइनमेंट का सर्वेक्षण किया गया और पर्यावरणीय पहलुओं का गहन अध्ययन किया गया। निरीक्षण प्रक्रिया में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की टीम ने भी मौके का दौरा कर स्थिति का आकलन किया।एलाइनमेंट तय करने के दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और एनएचएआई की संयुक्त टीम ने विभिन्न विकल्पों का स्थलीय निरीक्षण किया। साथ ही भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह भी ली गई, ताकि विकास कार्य और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।माना जा रहा है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा, जाम की समस्या से राहत मिलेगी तथा ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार के बीच आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा। अब सभी की नजर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति पर टिकी है, जिसके बाद इस महत्वपूर्ण परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
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