पणजी। कभी विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद माने जाने वाले गोवा में अब पर्यटन का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। ‘भारत की पार्टी राजधानी’ कहे जाने वाले गोवा के बीच साइड शैक्स, कैफे और बैकपैकर्स होटलों में आज भी पर्यटकों की भीड़ बनी हुई है, लेकिन अब यहां विदेशी सैलानियों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम नजर आ रही है।कुछ वर्ष पहले तक पालोलेम समेत गोवा के कई तटीय इलाकों में रूसी और यूरोपीय पर्यटकों की बड़ी संख्या देखने को मिलती थी। समुद्र किनारे बने होटलों, कैफे और बीच शैक्स में विदेशी पर्यटकों की रौनक आम बात थी, लेकिन अब यह दृश्य बदलता नजर आ रहा है। वर्तमान में यहां आने वाले पर्यटकों में अधिकांश संख्या घरेलू सैलानियों की है।पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों, बढ़ते खर्च और अन्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटन विकल्पों के कारण विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं भारतीय पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने गोवा के पर्यटन कारोबार को काफी हद तक संभाल रखा है।स्थानीय कारोबारियों के अनुसार अब होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन सेवाएं भी घरेलू पर्यटकों की पसंद और बजट को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं। हालांकि विदेशी पर्यटकों की कमी का असर कई छोटे व्यवसायों और बीच शैक्स पर भी पड़ा है, जो पहले अंतरराष्ट्रीय सैलानियों पर अधिक निर्भर रहते थे।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोवा को दोबारा विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाना है, तो पर्यटन सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं पर विशेष ध्यान देना होगा।
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