देहरादून। उत्तराखंड में 108 नंबर जहां मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन जैसी आपात सेवाओं के लिए जाना जाता है, वहीं 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले करीब एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने के साथ-साथ शिकायतों के समाधान, लाभार्थियों की निगरानी और मरीजों के उपचार की स्थिति का फॉलोअप करने वाले महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में विकसित हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने पर लगातार जोर दे रही है और इसी उद्देश्य से 104 हेल्पलाइन को महज सूचना उपलब्ध कराने वाले कॉल सेंटर तक सीमित न रखते हुए एक प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। स्वास्थ्य निदेशालय देहरादून में संचालित 104 कॉल सेंटर अब तक स्वास्थ्य से संबंधित एक करोड़ 38 लाख से अधिक कॉल कर चुका है और राज्य के सभी 13 जिलों में संचालित 27 स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक संपर्क स्थापित कर रहा है। इस व्यवस्था की खासियत यह है कि जरूरतमंद व्यक्ति के फोन करने का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के बाद उसकी आवश्यक जानकारी 104 कॉल सेंटर तक पहुंचती है, जिसके आधार पर संबंधित लाभार्थी से संपर्क कर उसकी स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की प्रगति की जानकारी ली जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह फॉलोअप व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की नियमित जानकारी ली जाती है। बच्चे के जन्म के बाद भी लगभग डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर नजर रखी जाती है, ताकि जरूरी टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। 104 हेल्पलाइन के माध्यम से आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया सहित 27 स्वास्थ्य सेवाओं एवं कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों की निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं से जुड़े लोगों को भी आवश्यक जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। हेल्पलाइन की भूमिका केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए मरीजों से सीधे फीडबैक भी लिया जाता है और केंद्र तथा राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ एवं प्रोत्साहन की जानकारी को लाभार्थियों से क्रॉस-चेक किया जाता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित योजना का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा है या नहीं। पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में इस तरह की प्रोएक्टिव स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था की उपयोगिता और बढ़ जाती है, क्योंकि इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लाभार्थियों तक फोन के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखने और उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने का अवसर मिलता है। करीब एक दशक के दौरान 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी, शिकायत निवारण, लाभार्थियों की निगरानी, फीडबैक और उपचार के फॉलोअप को एक ही व्यवस्था से जोड़ने का काम किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार का जोर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने पर है और 104 हेल्थ हेल्पलाइन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो नागरिकों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ लाभार्थियों तक सक्रिय रूप से पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की निरंतर निगरानी सुनिश्चित कर रही है।
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