भीषण गर्मी के प्रकोप से बचे हो सकता है डिहाइड्रेशन: डॉ रवि सहोता

काशीपुर। पिछले 50 वर्षों का रिकॉर्ड इस बार गर्मी ने तोड़ा है। गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है. उत्तराखंड चिलचिलाती धूप और लूँ से जूझ रहा है जहां पहाड़ी क्षेत्रों में भी चटक भरी धूप खिल रही है.. तो वही मैदानी क्षेत्रों में भी भीषण गर्मी से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है इस बेतहाशा गर्मी से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है.. जहां लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं चिकित्सकों ने इस गर्मी से लोगों को घर में रहने की सलाह दी है अगर अपना ख्याल नहीं रखा तो गर्मी से लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है। आपको बता दे कि उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बेहद ही गरम नजर आ रहा है,जिसके चलते सुबह से ही चिलचिलाती धूप और लूँ का सामना करना पड़ रहा है.. सुबह से ही चटक भरी धूप लोगों की परेशानियों का सबब बन गई है, दोपहर के 12:00 से शाम 4:00 बजे तक गर्म हवा के थपेड़ों के साथ झुलसने वाली गर्मी पढ़ने से लोगों का खुले में घूमना भी दूभर हो गया है..चिलचिलाती धूप और लूं का पूरा दिन ऐसा असर होता है शाम होते-होते उमस भरी हवा भी महसूस की जा सकती है..स्थानीय लोगों की माने तो उनका कहना है कि इस बार बेहद गर्मी का असर देखने को मिल रहा है और हमें लग रहा है कि पिछले 50 सालों के भीतर इतनी गर्मी तथा लूँ हमने नहीं देखी है.बाहर अगर काम के लिए निकलते हैं तो ऐसा लगता है कि मानो आग से झुलस जाएंगे… बाहर निकलने से पहले हमें मुंह पर कपड़ा बांधकर तथा साथ में पानी की व्यवस्था लेकर बाहर निकलते हैं और जो लोग मजदूरी के लिए जाते हैं उनको तो यह सब कुछ झेलना भी पड़ेगा क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले लोग अगर घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो शायद गर्मी से तो नहीं बल्कि भूख से मर जाएंगे… साथ ही उन्होंने बताया कि इस भीषण गर्मी मे विद्युत की कटौती इतनी होती है कि घर में रहना भी दुभर हो गया है। हीट वेव को लेकर इस समय जनता जूझ रही है। अस्पतालों में डिहाईड्रेशन जैसी बीमारी की ओपीडी दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी है। जब हीट वेव के विषय में नगर के सहोता हॉस्पिटल के स्वामी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। हमारी बॉडी 30 से 35 डिग्री गर्मी बर्दाश्त कर सकती है, इससे ऊपर 40 से 42 डिग्री गर्मी लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है, हीट वेव के चलते लोगों को पानी की कमी हो जाती है जिसके चलते डिहाइड्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को दस्त, उल्टी, जी मिचलाना, होता है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है, उन्होंने कहा कि सुबह 12:00 से 4:00 बजे तक 4 स्वयं और अपने बच्चों को घर से न निकलने दे, इमरजेंसी के चलते सर को ढक कर चले और तरल पदार्थ का उपयोग समय-समय पर करते रहे, बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दवाई उपलब्ध या ओआरएस नहीं मिल पाता है तो घर में भी महिलाएं ओआरएस बना सकते हैं, ओआरएस बनाने की विधि 1 लीटर पानी में एक मुट्ठी चीनी और पांच चुटकी नमक और नींबू मिलकर ओआरएस बनाकर डिहाइड्रेशन के मरीज को पिला सकते हैं और अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज करा सकते हैं।वही कृष्णा हॉस्पिटल की फिजिशियन चिकित्सक सारिका भदोरिया ने बताया कि इस समय हीट वेव को लेकर ओपीडी में इजाफा हुआ हे। डिहाइड्रेशन की बीमारी से ग्रस्त लोग अपना ख्याल रखें और नजदीकी चिकित्सकों से परामर्श लेकर ही अपना इलाज कराए, ज्यादा धूप में ना निकले और इस बीमारी को हल्के में भी ना लें, क्योंकि डिहाइड्रेशन जैसे बीमारी से लोगों की जान तक जा सकती है, इसलिए अपना ख्याल रखें और समय-समय पर तरल पदार्थ का प्रयोग अवश्य करते रहे।

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संपादक : एफ यू खान

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