रुद्रपुर। देशभर के ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने उन तीन मोबाइल एप के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है, जिनका कथित रूप से दुरुपयोग कर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के माध्यम से बंद किया जा रहा था। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इनमें से कुछ एप कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध दिखाई दे रहे थे। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग बाइक या कार से ई-रिक्शा के पास पहुंचकर मोबाइल एप के जरिए उसकी लिथियम-आयन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट होकर कुछ ही सेकंड में वाहन की बैटरी बंद कर देते थे। इसके चलते बीच सड़क पर ई-रिक्शा अचानक रुक जाता था, जिससे चालक और उसमें सवार यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। व्यस्त सड़कों पर ऐसी घटनाओं से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई थी, जिसके बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। विशेषज्ञों के अनुसार कई ई-रिक्शा बैटरियों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था या पासवर्ड नहीं होने के कारण इन एप के जरिए बैटरी तक आसानी से पहुंच बनाई जा रही थी और आउटपुट सप्लाई बंद कर वाहन रोक दिया जाता था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ई-रिक्शा चालकों और उनके संगठनों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संबंधित प्लेटफॉर्म को ऐसे एप हटाने के निर्देश दिए हैं और आवश्यकता पड़ने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत भी कार्रवाई की बात कही है। उधर, एसटीएफ एसएसपी अजय कुमार ने बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल मामलों का संज्ञान लेते हुए तकनीकी टीम को जांच में लगाया गया है। साथ ही संबंधित बैटरियों के निर्माता, ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी बंद करने में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तकनीक का उपयोग आमजन की सुविधा और सुरक्षा के लिए होना चाहिए, न कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए।
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