काशीपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने के दावे उस समय सवालों के घेरे में आ गए, जब शहर के अग्रसेन पार्क में पेड़ों को हटाए जाने का मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि पार्क में आई आंधी के दौरान तीन पेड़ गिर गए थे, लेकिन इसके बाद जेसीबी की मदद से नौ अन्य पेड़ों को भी जड़ समेत जमीन से उखाड़ दिया गया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इन नौ पेड़ों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?मामला केवल पेड़ों के गिरने या हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्रवाई के औचित्य पर भी सवाल ऽड़े हो रहे हैं। यदि आंधी में तीन पेड़ ही गिरे थे तो बाकी नौ पेड़ों को क्यों उऽाड़ा गया? क्या वे भी क्षतिग्रस्त थे या फिर उन्हें किसी अन्य कारण से हटाया गया? स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, जेसीबी से पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़ा गया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेड़ों को हटाने से पहले क्या उनकी स्थिति का तकनीकी आकलन कराया गया था? क्या संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी? यदि पेड़ स्वस्थ थे तो उन्हें जड़ समेत उखाड़ने का फैसला किस आधार पर लिया गया? जिम्मेदार अधिकारियों को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। अग्रसेन पार्क शहरवासियों के लिए सुकून और हरियाली का प्रमुख स्थान है। यहां सुबह-शाम लोग टहलने आते हैं और बच्चे भी खुले वातावरण में समय बिताते हैं। ऐसे में पार्क की हरियाली को इस तरह उजाड़े जाने से पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कुल कितने पेड़ आंधी में गिरे और कितने जेसीबी से उऽाड़े गए। साथ ही पेड़ हटाने का आदेश, अनुमति और कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनकी जगह नए पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सवाल यह है कि आंधी में तीन पेड़ गिरे थे तो बाकी नौ पेड़ों की जड़ें किसके आदेश पर उखाड़ी गईं? अग्रसेन पार्क की उजड़ी हरियाली अब जिम्मेदारों से जवाब मांग रही है।
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