देहरादून। साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए गृह मंत्रालय ने एक नई और महत्वपूर्ण व्यवस्था शुरू की है। अब साइबर अपराध का शिकार हुए लोगों को अपनी फ्रीज (होल्ड) की गई धनराशि वापस पाने के लिए पुलिस थानों, बैंकों और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) पोर्टल शुरू किया गया है। इस नई सुविधा के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ित स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी धनराशि की वापसी के लिए दावा प्रस्तुत कर सकेंगे।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को शीघ्र राहत पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की गई है। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर केवल वही लोग आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने समय रहते साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई हो और जिनकी धनराशि अपराधियों के बैंक खातों में होल्ड कर दी गई हो।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल उन्हीं मामलों में उपलब्ध होगी, जहां साइबर ठगों के खातों में मौजूद धनराशि को समय रहते फ्रीज कर दिया गया है। यदि धनराशि अपराधियों द्वारा खाते से निकाली जा चुकी है तो ऐसे मामलों में इस पोर्टल के माध्यम से रिफंड प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।एसएसपी अजय सिंह ने नागरिकों से अपील की कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर सूचना दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को होल्ड कर पीड़ित को राहत दिलाई जा सके।उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से साइबर अपराध पीड़ितों को राहत मिलने के साथ-साथ धनवापसी की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होगी।
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