काशीपुर। न्यायालय ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदने के चर्चित मामले में आरोपी सौरभ अग्रवाल और गौरव अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि आरोप संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस बनवाने और उसके आधार पर हथियार खरीदने से जुड़े हैं। न्यायालय में दाखिल याचिका में आरोपियों ने दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर झूठे तथ्यों पर आधारित है और उन्होंने न तो कोई फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न ही फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे। उन्होंने गिरफ्रतारी की स्थिति में भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की दलील देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। सरकारी पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आरोपियों और अन्य सह-अभियुक्तों ने योजनाबद्ध तरीके से अपने दस्तावेजों में काशीपुर की बजाय उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का पता दर्शाकर फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लाइसेंस राष्ट्रीय डेटाबेस पोर्टल पर भी प्रदर्शित किए गए और उन्हीं के आधार पर हथियार खरीदे गए। जांच के दौरान मिले अभिलेखो के अनुसार आरोपियों ने काशीपुर स्थित एक गन हाउस से फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे। दस्तावेजों की जांच में लाइसेंसों पर शाहजहांपुर से जारी होने का उल्लेख मिला, जबकि बाद में जिला प्रशासन शाहजहांपुर ने स्पष्ट किया कि संबंधित लाइसेंस आरोपियों के नाम कभी जारी ही नहीं किए गए थे। अभियोजन के अनुसार सौरभ अग्रवाल ने कथित फर्जी लाइसेंस के आधार पर -22 बोर राइफल और 7-62 बोर पिस्टल खरीदी, जबकि गौरव अग्रवाल द्वारा भी उसी आधार पर एसबीबीएल बंदूक खरीदे जाने के आरोप हैं।
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