काशीपुर। शहर में एक बार फिर सड़कों की खुदाई ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नई बनी सड़कें बार-बार क्यों खोदी जाती हैं? यदि किसी सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन, सीवर, गैस लाइन, बिजली के केबल या इंटरनेट फाइबर बिछाने का काम होना था, तो वह सड़क बनने से पहले क्यों नहीं किया गया?हर बार सड़क बनने के बाद अलग-अलग विभाग अपने-अपने कार्यों के लिए उसी सड़क को दोबारा खोद देते हैं। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि धूल, कीचड़, दुर्घटनाओं का खतरा और आम नागरिकों की परेशानी भी कई गुना बढ़ जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सड़क निर्माण पर खर्च होने वाला पैसा भी आखिरकार जनता के टैक्स से ही आता है।विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति की सबसे बड़ी वजह विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी मानी जाती है। यदि सड़क निर्माण, जल संस्थान, सीवर, बिजली, गैस और दूरसंचार विभाग पहले से संयुक्त योजना बनाकर काम करें, तो अधिकांश मामलों में बार-बार खुदाई से बचा जा सकता है। कई शहरों में इसी उद्देश्य से सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त योजना पर ज़ोर दिया जा रहा है। काशीपुर में भी सड़क, जल निकासी, सीवर और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट विभिन्न चरणों में चल रहे हैं। ऐसे प्रोजेक्ट लंबे समय में शहर को बेहतर सुविधाएँ दे सकते हैं, लेकिन नागरिकों की अपेक्षा है कि इन कार्यों का बेहतर समन्वय हो ताकि एक ही सड़क को बार-बार न खोदना पड़े।
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