नैनीताल। जिले में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से नियमों के विपरीत शुल्क वसूले जाने के मामलों पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई का असर अब दिखाई देने लगा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के बाद जिले के 46 निजी विद्यालयों ने अभिभावकों से अतिरिक्त रूप से वसूली गई 39 लाख पांच हजार 405 रुपये की धनराशि वापस कर दी है या फिर उसे अन्य शुल्क में समायोजित किया गया है। शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि कई निजी विद्यालयों में स्थानांतरण प्रमाण पत्र यानी टीसी जारी करने के नाम पर शासन द्वारा निर्धारित मात्र एक रुपये के शुल्क के स्थान पर अभिभावकों से 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक वसूले जा रहे थे। विभाग की ओर से इस तरह की शिकायतों और अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों की जांच की गई और नियमों के अनुरूप शुल्क लेने के निर्देश दिए गए। कार्रवाई के बाद संबंधित विद्यालयों ने टीसी शुल्क को घटाकर निर्धारित एक रुपये कर दिया तथा पहले वसूली गई अतिरिक्त धनराशि को अभिभावकों को लौटाने या उनके अन्य शुल्क में समायोजित करने की प्रक्रिया अपनाई। शिक्षा विभाग की कार्रवाई केवल टीसी शुल्क तक सीमित नहीं रही, बल्कि निजी विद्यालयों द्वारा ट्यूशन फीस, परीक्षा शुल्क और पंजीकरण शुल्क के नाम पर ली जा रही राशि की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार जांच अभियान के बाद आठ विद्यालयों ने नियमों के विपरीत बढ़ाई गई ट्यूशन फीस में कमी की है, जबकि 39 विद्यालयों ने मनमाने ढंग से वसूले जा रहे परीक्षा शुल्क को कम किया है। इसके साथ ही 15 निजी विद्यालयों ने पंजीकरण शुल्क में कमी की है अथवा उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाले शुल्क को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है और विद्यालयों को निर्धारित नियमों के अनुसार ही फीस लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी नेगी ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि किसी विद्यालय की ओर से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगी जाती है या फीस से संबंधित किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो वे इसकी सूचना शिक्षा विभाग को दें। अभिभावक अपनी शिकायत मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ई-मेल आईडी [email protected] पर भेज सकते हैं। विभाग की ओर से शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की बात कही गई है और प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार जिन निजी विद्यालयों ने अब तक अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त धनराशि वापस नहीं की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। ऐसे विद्यालयों के मामलों की समीक्षा के बाद विद्यालयी शिक्षा विभाग की ओर से कठोर कार्रवाई की जा सकती है और नियमों का लगातार उल्लंघन करने वाले संस्थानों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति भी शासन को भेजी जा सकती है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निजी विद्यालयों को निर्धारित नियमों के दायरे में रहकर ही शुल्क वसूलना होगा और अभिभावकों पर अनुचित आर्थिक दबाव बनाने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। जिले में चल रहे इस अभियान से उन अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें विभिन्न मदों में निर्धारित शुल्क से अधिक राशि का भुगतान करना पड़ रहा था। विभाग ने संकेत दिया है कि फीस से जुड़ी अनियमितताओं की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी, ताकि निजी विद्यालयों में शुल्क व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे और अभिभावकों से नियम विरुद्ध किसी प्रकार की अतिरिक्त वसूली न हो।
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