नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठाए सवाल, स्वास्थ्य सचिव को निरीक्षण के निर्देश

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि कई अस्पतालों से वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टरों का स्थानांतरण किए जाने के बाद उनकी जगह संबंधित अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव समेत अन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। अधिकारियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं तथा रिक्त और स्थानांतरण के कारण खाली हुए डॉक्टरों के पदों पर जल्द ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्तियां की जाएंगी। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से यह भी जानकारी मांगी कि प्रदेश के किस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की क्या कमियां हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान जिला अस्पताल नैनीताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी भी कोर्ट के समक्ष रखी गई। इस पर कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से कहा कि चूंकि वह वर्तमान में नैनीताल में हैं, इसलिए अस्पताल का स्वयं मौका मुआयना कर यह जांच करें कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सुविधाएं वास्तव में अस्पताल में उपलब्ध हैं या नहीं और वर्तमान स्थिति क्या है। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि एक ईसीजी जैसी सुविधा के लिए भी मरीज को नैनीताल से हल्द्वानी रेफर किया जाता है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में कई सुविधाएं उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने नैनीताल सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाए जाने के संबंध में अगली सुनवाई तक अप्रूवल रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई। न्यायमित्र की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने हाल ही में राजकीय मेडिकल कॉलेज सुशीला तिवारी अस्पताल के 16 वरिष्ठ डॉक्टरों तथा बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के कई वरिष्ठ डॉक्टरों का स्थानांतरण किया है। आरोप है कि इन डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद उनकी जगह दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे दोनों अस्पतालों में आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। न्यायमित्र ने कोर्ट के समक्ष कहा कि दोनों अस्पतालों में रेफर किए गए गंभीर मरीज भी पहुंचते हैं, ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि डॉक्टरों के स्थानांतरण के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और यदि स्थानांतरण आवश्यक हो तो उनकी जगह विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए अन्य स्थानों पर रेफर न करना पड़े। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कई डॉक्टरों का स्थानांतरण ऐसे अस्पतालों में किया जा रहा है जो अभी पूरी तरह संचालित नहीं हैं, जबकि जो अस्पताल वर्तमान में मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं, वहां डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।

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