काशीपुर। जनजीवन उत्थान समिति के तत्वाधान में प्रेरणा भवन के सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बोलते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता तथा हिंदी प्रेम सभा समिति के उपाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि हिंदी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज की सोच संस्कृति और भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती है। हिंदी देश की आत्मा है 14 सितंबर 1949 को भारत के संविधान में हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा स्वीकार किया गया हिंदी भाषा के विकास में अमीर खुजरो ने भी अपना विशेष योगदान दिया था हिंदी में सोचना और उसे समृद्ध करना आज युवाओं के लिए भी तकनीकी रूप से आवश्यक है आज हिंदी वैश्विक डिजिटल जगत में मुख्य रूप से उभर कर सामने आ रही है और वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र को साकार कर रही है हिंदी पूरे विश्व में बोले जाने वाली भाषा है और इसका उदय संस्कृत भाषा से लगभग 1200 वर्ष पूर्व हुआ था तकनीकी उत्कृष्टता के दौर में भी हिंदी भाषा ने विकास के आयाम को छुआ है, आज जरूरत है देश की राष्ट्रभाषा का सम्मान कर प्रण ले कि अपने कार्य हिंदी भाषा में करेंगे। इस मौके पर भास्कर त्यागी एडवोकेट, सैयद आसिफ अली एडवोकेट, देवांग मिश्रा एडवोकेट, विवेक कुमार मिश्रा एडवोकेट, नवजोत सिंह एडवोकेट, अमृतपाल सिंह एडवोकेट, पंकज कश्यप एडवोकेट आदि उपस्थित रहे। बाद में बच्चों को कॉपी पेंसिल वितरित की गई।
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