श्रीरामकथा का हवन-यज्ञ एवं प्रसाद वितरण के साथ विश्राम

काशीपुर। श्रीरामकथा का हवन-यज्ञ एवं प्रसाद वितरण के साथ आज विधिवत विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालु भावुक हो उठे। भक्तों की भावुकता देखकर व्यासजी पूज्य पंडित गोपालानन्दजी महाराज भी द्रवित हो उठे। उन्होंने भावुक कंठ से सभी को दीर्घायु एवं श्रीराम भक्ति में डूबे रहने का आशीर्वाद दिया।कथा के सातवें दिन व्यासजी महाराज ने सीताहरण, लंका दहन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण मूर्छा, मेघनाद वध, कुंभकरण वध, रावण वध, माता जानकी की अग्निपरीक्षा, भगवान श्रीराम की पुष्पक विमान से अयोध्या वापसी, भरत मिलाप और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक सहित विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।उन्होंने कहा कि भक्ति मार्ग में कष्ट तो उठाने पड़ते हैं, लेकिन अंततः यह मार्ग सुऽदायी होता है। संतों ने कहा है कि काम करते रहो और राम नाम का जाप करते रहो। उन्होंने भक्ति की महिमा बताते हुए श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने का संदेश दिया।कथा श्रवण करने पहुंचे प्रमुऽ लोगों में सुभाषचन्द्र शर्मा, अनमोल रतन, विनोद कुमार श्रीवास्तव, डॉ- महेश अग्निहोत्री आरपी राय, हरिओम प्रकाश अग्रवाल, चन्द्रभान सिंह, महीपाल सिंह, अविनाश तिवारी, एडवोकेट केके अग्रवाल, शिवम यादव, प्रवेश गुप्ता, सुशील माहेश्वरी, शंभूनाथ अग्रवाल, मनोहरलाल गुप्ता, चारुभाई पाण्डेय, अशोक धीमान, अशोक पैगिया, शंभू शंकर झा, अशोक तोमर, सुरेश राठौर के नाम विशेष रूप से उल्लेऽनीय रहे।कथा स्थल महाराजा हरिसेन पार्क से विदा लेते समय व्यासजी महाराज ने सभी कथा प्रेमियों को अयोध्या धाम पहुंचने का निमंत्रण दिया, जिसे सुनकर श्रद्धालु हर्षित हो उठे।

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संपादक : एफ यू खान

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