काशीपुर। राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय बैंक हड़ताल का काशीपुर में व्यापक असर देखने को मिला। विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने महाराणा प्रताप चौक स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। सभा का संचालन सहायक महामंत्री कामरेड स्वतंत्र कुमार मेहरोत्रा ने किया। अध्यक्षता उपाध्यक्ष कामरेड ललित कुमार तिवारी व कामरेड सतपाल शर्मा ने की। संयोजक उपमंत्री अर्पित सिंह रहे। संगठन मंत्री रोबिन कुमार, गिरीश पोखरियाल व मंत्री मयंक राणा ने हड़ताल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब नेशनल बैंक से मयंक राणा, स्टेट बैंक से शमशीद नवाज और केनरा बैंक से अमित कुमार ने भी सहयोग दिया।कामरेड स्वतंत्र कुमार मेहरोत्र ने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार लगातार उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने बैंक कार्यदिवस सप्ताह में पांच दिन करने, पीएलआई योजना में सुधार, श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलाव वापस लेने, ग्राहकों की जमा राशि के दुरुपयोग पर रोक लगाने, बड़े व्यापारियों के ऋण माफ करने की नीति रोकने, बैंकों का निजीकरण बंद करने तथा आउटसोर्सिंग समाप्त करने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि हड़ताल में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, नैनीताल बैंक, स्टेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, आंध्रा बैंक, पूर्वांचल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने सहयोग किया। प्रदर्शन में सुशील चौधरी, सचिन कुमार, मोनिका पाठक, देव सिंह, हरिओम, अंकित कुमार, के-एस- डिल्लन, गौतम, नरेश कुमार, अरविंद राठी, राकेश कुमार, विकास रोहेल्ला, विकास कुमार, जगदीश सिंह बिष्ट, योगेश पेंट, ज्योति चौधरी, रमेश चौधरी, नंदन गिरी, मुदित जोशी, वीरेंद्र सिंह रावत, कमल पाल पांडे, सुभाष शर्मा, प्रियंका जायसवाल, संजय गिरी, पुलकित सिंह और हिमांशु सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। संगठन ने हड़ताल के कारण ग्राहकों को हुई असुविधा पर खेद जताया। वक्ताओं ने दावा किया कि हड़ताल से देशभर में कई सौ करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और वित्त मंत्रलय की है। अंत में कर्मचारियों ने मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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