काशीपुर। बहुचर्चित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सड़क को चीरकर बाहर निकला लोहे का मोटा सरिया राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। चिंताजनक बात यह है कि संबंधित विभाग ने स्थायी मरम्मत कराने के बजाय सरिए के पास केवल सीमेंट का कट्टे रखकर औपचारिक अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस रेलवे ओवरब्रिज के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद निर्माण संबंधी खामियां सामने आने लगी थीं। कभी एक्सपेंशन जॉइंट क्षतिग्रस्त हुए, कभी सुरक्षा दीवार टूटी और अब सड़क की सतह से लोहे का सरिया बाहर निकल आया है। लगातार सामने आ रही इन तकनीकी समस्याओं ने निर्माण की गुणवत्ता और कार्यदायी संस्था की पोल खोल कर रख दी है। इस आरओबी से प्रतिदिन हजारों दोपहिया वाहन, कारें, स्कूल बसें और भारी वाहन गुजरते हैं। सड़क के बीच निकला सरिया किसी भी वाहन का टायर फाड़ सकता है या चालक का संतुलन बिगाड़कर गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों के चलते स्थानीय लोग अब इस पुल को व्यंग्य में ‘लकवाग्रस्त आरओबी’ कहने लगे हैं। उनका कहना है कि जनता की सुविधा के लिए बनाया गया पुल अब असुरक्षा और भय का प्रतीक बनता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब भी कोई तकनीकी खराबी सामने आती है, विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है। कुछ समय बाद फिर कोई नई समस्या सामने आ जाती है, जिससे लोगों का भरोसा लगातार कम हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस से पहले शहरवासियों ने आरओबी की व्यापक तकनीकी जांच कराकर सभी खामियों को तत्काल दूर करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी मरम्मत नहीं कराई गई तो यह पुल किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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