श्रीमती निशा कालरा की मरणोपरांत भी आंखें बिखरेगी दुनिया में रोशनी

काशीपुर। मरणोपरांत नेत्रदान के जरिए किसी के जीवन में रोशनी लाने की प्रेरणादायी पहल को आगे बढ़ाते हुए वसुधैव कुटुम्बकम् काशीपुर के तत्वावधान में 60 वां नेत्रदान संपन्न हुआ। स्वर्गीय स्वामी दयाल कालरा की धर्मपत्नी श्रीमती निशा कालरा के निधन के बाद उनके पुत्र मनीष कालरा ने अपनी माता की इच्छा के अनुरूप नेत्रदान कराया। दान किए गए कॉर्निया से दो लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना है।श्रीमती निशा कालरा का 23 सितंबर की मध्यरात्रि निधन हुआ। इसके बाद परिवार की इच्छा पर नेत्रदान की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर कॉर्निया सुरक्षित किए गए। संस्था के अध्यक्ष विकास जैन ने कहा कि नेत्रदान मानव सेवा का ऐसा पुनीत कार्य है, जिसके माध्यम से व्यक्ति मरणोपरांत भी किसी के जीवन में रोशनी ला सकता है। उन्होंने समाज से नेत्रदान के प्रति जागरूक होने की अपील की। संस्था के सचिव प्रियांशु बंसल ने बताया कि नेत्रदान के लिए उम्र अपने आप में बाधा नहीं है। कई सामान्य बीमारियों या मोतियाबिंद के उपचार के बाद भी कॉर्निया दान संभव हो सकता है। अंतिम उपयोगिता का निर्णय नेत्र बैंक अथवा चिकित्सकीय टीम करती है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया सम्मानपूर्वक की जाती है और सामान्यतः अंतिम दर्शन में कोई विकृति दिऽाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान की इच्छा होने पर परिजन आंखे बंद रखे, सिर को थोड़ा ऊंचा रखे, पंखे की सीधी हवा से आंखो को बचाएं और यथाशीघ्र नेत्रदान सहायता टीम से संपर्क करें। नेत्रदान सहायता के लिए 24 घंटे 9837080678 और 9548799947 पर संपर्क किया जा सकता है।संस्था के संरक्षक योगेश जिंदल, अध्यक्ष विकास जैन, सचिव प्रियांशु बंसल, कोषाध्यक्ष सौरभ अग्रवाल, संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल, दीपक मित्तल, आशीष गुप्ता, अनुज सिंघल, अंकुर मित्तल, आशीष पैगिया एवं सीए सचिन अग्रवाल ने कालरा परिवार के निर्णय के लिए आभार जताते हुए दिवंगत आत्मा की चिरशांति की प्रार्थना की। संस्था ने क्षेत्रवासियों से मरणोपरांत नेत्रदान के प्रति जागरूक होकर अभियान से जुड़ने की अपील की।

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संपादक : एफ यू खान

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