हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पतंजलि वेलनेस योगग्राम में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर योग गुरु एवं पतंजलि के संस्थापक स्वामी रामदेव भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारतीय परंपराओं, आयुर्वेद और योग की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्व आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम का शुभारंभ होना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और योग से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन जीवन पद्धति और परंपराओं में स्वास्थ्य, प्रकृति और संतुलित जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण ज्ञान का भंडार है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि योग को देश और दुनिया के हर घर तक पहुंचाने के लिए जिन लोगों ने प्रयास किए हैं, उनसे प्रेरणा लेकर भारतीय ज्ञान एवं परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जिन परंपराओं और जीवन पद्धतियों को अपनाया, उनमें जीवन को स्वस्थ और संतुलित रखने की महत्वपूर्ण सीख छिपी हुई है। इन परंपराओं को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने वाली भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।पतंजलि गुरुकुलम के अनुसार, संस्थान भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है, जहां पारंपरिक वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। हरिद्वार स्थित गुरुकुलम में कक्षा चार से 12वीं तक की शिक्षा का प्रावधान बताया गया है। संस्थान के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों के साथ भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और पारंपरिक जीवन मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा एवं तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को तैयार किया जाना समय की आवश्यकता है। आयुर्वेद, योग और भारतीय जीवन पद्धति से जुड़े ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने से देश की प्राचीन विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
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